- Chhattisgarh News: विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 13 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है.
- 36 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते
- एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 36 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
- नंगे पाँव होने की वजह
- रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.
- क्या कहते है क्षेत्रवासी
- जनपद सदस्य चंद्रप्रताप सिंह ने बताया कि रविशंकर तपती धूप में भी नंगे पांव चलकर गरीबों के साथ खड़े रहते है. उनकी मदद करते है. हमने भी उन्हें अपने काम के लिए कई बार कहा. तब वे हमेशा हमारे सुख-दुख में साथ खड़े रहते है. वे लगातार तीन बार जिला पंचायत सदस्य रहे है. और लोगों की भलाई के लिए संघर्षरत हैं. ग्रामीण उमेश केंवट ने बताया कि उन्हें (रविशंकर) को ठंडी, गर्मी, बरसात किसी भी मौसम में बुलाइए वे लोगों की मदद के लिए नंगे पांव आते है. किसी भी प्रकार का काम हो वे आधी रात को भी आते है. और तहसील, जिला से संबंधित हर काम में मदद करते है. हमे ऐसे ही नेता की जरूरत थी. हम ऐसा नेता पाकर खुश हैं.V
- धर्मार्थ वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए,धार्मिक मंदिर, धर्मशाला, अनाथालय, बाल आश्रम, वृद्धाश्रम, धर्मार्थ अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, मेडिकल और पैरामेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज,और सभी प्रकार की मानव सेवा से संबंधित कार्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य शिविर, गुरुकुल, धार्मिक सेवा और विभिन्न प्रकार के शैक्षिक प्रतिष्ठान और संस्थानों का संचालन, समाज का हर वर्ग धर्म के गरीब लोगों की मदद, मुक्तिधाम सेवा, वाणिज्य के लिए जाता है और उनकी सेवा करता है।
- कला, विज्ञान, खेल, शिक्षा, अनुसंधान, सामाजिक कल्याण, धर्म, दान, पर्यावरण की रक्षा, महिला सशक्तिकरण, पशु कल्याण, स्वच्छता (स्वच्छ भारत) आदि।
बन जुगनू जगमग कर जाएं, आओ मन का दीप जलाएं
बन जुगनू जगमग कर जाएं, आओ मन का दीप जलाएं
भेद भाव की छोड़ बुराई, भर मन में अपने अच्छाई
दिल में जो अंधकार भरा है, दीपक दिल में बुझा पड़ा है
दिल से नफ़रत द्वेष मिटाएं , आओ मन का दीप जलाएं
Chhattisgarh News: विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 16 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है.
40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 36 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
नंगे पाँव होने की वजह
रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.
क्या कहते है क्षेत्रवासी
जनपद सदस्य चंद्रप्रताप सिंह ने बताया कि रविशंकर तपती धूप में भी नंगे पांव चलकर गरीबों के साथ खड़े रहते है. उनकी मदद करते है. हमने भी उन्हें अपने काम के लिए कई बार कहा. तब वे हमेशा हमारे सुख-दुख में साथ खड़े रहते है. वे लगातार तीन बार जिला पंचायत सदस्य रहे है. और लोगों की भलाई के लिए संघर्षरत हैं. ग्रामीण उमेश केंवट ने बताया कि उन्हें (रविशंकर) को ठंडी, गर्मी, बरसात किसी भी मौसम में बुलाइए वे लोगों की मदद के लिए नंगे पांव आते है. किसी भी प्रकार का काम हो वे आधी रात को भी आते है. और तहसील, जिला से संबंधित हर काम में मदद करते है. हमे ऐसे ही नेता की जरूरत थी. हम ऐसा नेता पाकर खुश हैं.
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रविशंकर सिंह
40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
रविशंकर सिंह
40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
रविशंकर सिंह
40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
रविशंकर सिंह
40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
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एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं
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एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं
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एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं
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एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं
रविशंकर
विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 16 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है.
रविशंकर
रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.
रविशंकर
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 40 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
रविशंकर
क्या कहते है क्षेत्रवासी
जनपद सदस्य चंद्रप्रताप सिंह ने बताया कि रविशंकर तपती धूप में भी नंगे पांव चलकर गरीबों के साथ खड़े रहते है. उनकी मदद करते है. हमने भी उन्हें अपने काम के लिए कई बार कहा. तब वे हमेशा हमारे सुख-दुख में साथ खड़े रहते है. वे लगातार तीन बार जिला पंचायत सदस्य रहे है. और लोगों की भलाई के लिए संघर्षरत हैं. ग्रामीण उमेश केंवट ने बताया कि उन्हें (रविशंकर) को ठंडी, गर्मी, बरसात किसी भी मौसम में बुलाइए वे लोगों की मदद के लिए नंगे पांव आते है. किसी भी प्रकार का काम हो वे आधी रात को भी आते है. और तहसील, जिला से संबंधित हर काम में मदद करते है. हमे ऐसे ही नेता की जरूरत थी. हम ऐसा नेता पाकर खुश हैं.
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 36 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं
Chhattisgarh News: विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 16 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है.
40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 36 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
नंगे पाँव होने की वजह
रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.
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Charity Food
अन्नदान, ज़रूरतमंदों, गरीबों और दिव्यांगों को पौष्टिक भोजन नि:शुल्क उपलब्ध कराने की एक नेक पहल है। दान के लिए दाल, चावल, और गैर-नाशवान खाद्य पदार्थ उत्तम माने जाते हैं, जो भूख मिटाने और कुपोषण को कम करने में मदद करते हैं। यहाँ Charity Food (अन्नदान) से जुड़े मुख्य बिंदु हैं: उद्देश्य: भूख मिटाना, कुपोषण को दूर करना और समाज के कमजोर वर्गों को पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना। दान की जाने वाली चीजें: दालें, चावल, डिब्बाबंद सूखे पदार्थ, और पौष्टिक स्नैक्स। प्रमुख पहल: अन्नदान: भारतीय परंपरा में इसे पवित्र भेंट माना जाता है। महत्व: यह ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने का एक तरीका है। सावधानी: दान किया जाने वाला भोजन ताजा और पौष्टिक होना चाहिए। आप अपनी खुशियों के मौके (जन्मदिन, वर्षगांठ) पर भी अन्नदान के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।

Homeless People
बेघर, आवासहीन, निराश्रय या गृहहीन है। ये वे लोग हैं जिनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित, स्थायी या स्थायी घर नहीं है, जो अक्सर फुटपाथों, सड़कों, या रैन बसेरों में रहते हैं। भारत में लाखों लोग बेघर हैं, जो चरम मौसम, खराब स्वास्थ्य, और पहचान के अभाव जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं। बेघर लोगों से संबंधित मुख्य विवरण: अर्थ और परिभाषा: 'बेघर' (Homeless) उन लोगों को संदर्भित करता है जो गरीबी, बेरोजगारी, या अन्य कारणों से घर विहीन हैं। परिस्थिति: वे मुख्य रूप से सड़कों, रेलवे स्टेशनों, फ्लाईओवरों के नीचे या अस्थायी रैन बसेरों में जीवन गुजारते हैं। भारतीय परिदृश्य: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 17 लाख से अधिक बेघर लोग हैं, हालांकि गैर-सरकारी अनुमानों के अनुसार यह संख्या 30 लाख से अधिक हो सकती है। मुख्य चुनौतियां: मौसम: गर्मियों और सर्दियों में भीषण मौसम का सामना करना। स्वास्थ्य: उचित इलाज न मिलना और खराब जीवन स्थितियां। पहचान: राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों का न होना। गृहहीन आवासहीन निराश्रय (जिनका कोई आश्रय न हो) खानाबदोश (स्थान बदलने वाले)

Education
जिसके माध्यम से ज्ञान, कौशल, मूल्य, और अनुभव प्राप्त किए जाते हैं। यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक विकास के साथ-साथ सही दृष्टिकोण विकसित कर उसे सभ्य, जागरूक और सक्षम बनाती है। हिंदी में इसे 'शिक्षा' या 'पढ़ाई-लिखाई' कहा जाता है, जो जीवन भर चलने वाली सीखने-सिखाने की प्रक्रिया है। शिक्षा के प्रमुख पहलू अर्थ और परिभाषा: यह ज्ञान की प्राप्ति और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली प्रक्रिया है। इसमें शिक्षा के माध्यम से नैतिकता और कौशल विकसित किए जाते हैं। प्रकार: शिक्षा को औपचारिक (स्कूल/कॉलेज), अनौपचारिक (अनुभव), और गैर-औपचारिक के रूप में बांटा जा सकता है। महत्व: शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति समस्याओं को सुलझाने के योग्य बनता है और स्वस्थ, जागरूक जीवनशैली अपनाता है। शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति का सर्वांगीण विकास (शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक) संभव है।

Child Protection,Women Empowerment
भारत में बाल संरक्षण (Child Protection) और महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक रूप से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र और सक्षम बनाना। उद्देश्य: पितृसत्तात्मक समाज में बराबरी (Parity) लाना, लैंगिक असमानता को कम करना, और शिक्षा व रोजगार तक पहुँच प्रदान करना। प्रमुख योजनाएं: Mission Shakti: महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एकीकृत योजना। Beti Bachao Beti Padhao: बालिकाओं की शिक्षा और जीवन सुनिश्चित करना। Mahila Samridhi Yojana: पिछड़े और गरीब पृष्ठभूमि की महिला उद्यमियों को सहायता। One Stop Centres: हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सा, कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता। आर्थिक सशक्तिकरण: कौशल विकास, ऋण और वित्तीय साक्षरता के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।

Crowdfunding
क्राउडफंडिंग (Crowdfunding) का अर्थ है, किसी नेक काम, मेडिकल इमरजेंसी, या बिजनेस स्टार्टअप के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़ी संख्या में लोगों (भीड़) से छोटे-छोटे योगदान (पैसा) जुटाना। यह सोशल मीडिया के माध्यम से काम करता है, जहां जरूरतमंद या उद्यमी अपना अभियान (Campaign) बनाकर अनजान लोगों से आर्थिक सहायता मांगते हैं। क्राउडफंडिंग के मुख्य प्रकार: दान-आधारित (Donation-based): बिना किसी रिटर्न के किसी सामाजिक कारण या बीमारी के इलाज के लिए सहायता लेना। वीडियो और जानकारी के साथ अपनी जरूरत को लोगों के सामने रखना। प्रचार करना: सोशल मीडिया का उपयोग कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना। फंड प्राप्त करना: निर्धारित अवधि में लक्ष्य पूरा होने पर धन राशि प्राप्त करना।

Charitable Hospitals,Public Health Camps
धर्मार्थ वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए,धार्मिक मंदिर, धर्मशाला, अनाथालय, बाल आश्रम, वृद्धाश्रम, धर्मार्थ अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, मेडिकल और पैरामेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज,और सभी प्रकार की मानव सेवा से संबंधित कार्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य शिविर, गुरुकुल, धार्मिक सेवा और विभिन्न प्रकार के शैक्षिक प्रतिष्ठान और संस्थानों का संचालन, समाज का हर वर्ग धर्म के गरीब लोगों की मदद, मुक्तिधाम सेवा, वाणिज्य के लिए जाता है और उनकी सेवा करता है। कला, विज्ञान, खेल, शिक्षा, अनुसंधान, सामाजिक कल्याण, धर्म, दान, पर्यावरण की रक्षा, महिला सशक्तिकरण, पशु कल्याण, स्वच्छता (स्वच्छ भारत) आदि।

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गरीबों की समस्या देख त्याग दिया चप्पल, 13 साल से नंगे पांव हैं ये आदिवासी नेता
नंगे पाँव होने की वजह
रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.
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विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 13 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है.
RAVISHANKAR SINGH
Ravishankar singh
अध्यक्ष जिला पंचायत मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़) खजान्ची कालोनी, जनकपुर (छत्तीसगढ़) ग्राम कन्नौज (भरतपुर) तह, भरतपुर पोस्ट जनकपुर जिला मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़) पिन 497778 मो.नं. 9165439739 +916263101888 Email :- ravishankar02020@gmail.com Website : www.ravishankarbairagi.comRAVISHANKAR SINGH
यशवंती रविशंकर,अध्यक्ष, जिला पंचायत मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़)
खजान्ची कालोनी, जनकपुर (छत्तीसगढ़) ग्राम कन्नौज (भरतपुर) तह, भरतपुर पोस्ट जनकपुर जिला मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़) पिन 497778 मो.नं. 9165439739 +916263101888 Email :- ravishankar02020@gmail.com Website : www.ravishankarbairagi.comOur Testimonials
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धर्मार्थ वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए,धार्मिक मंदिर, धर्मशाला, अनाथालय, बाल आश्रम, वृद्धाश्रम, धर्मार्थ अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, मेडिकल और पैरामेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज,और सभी प्रकार की मानव सेवा से संबंधित कार्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य शिविर, गुरुकुल, धार्मिक सेवा और विभिन्न प्रकार के शैक्षिक प्रतिष्ठान और संस्थानों का संचालन, समाज का हर वर्ग धर्म के गरीब लोगों की मदद, मुक्तिधाम सेवा, वाणिज्य के लिए जाता है और उनकी सेवा करता है। कला, विज्ञान, खेल, शिक्षा, अनुसंधान, सामाजिक कल्याण, धर्म, दान, पर्यावरण की रक्षा, महिला सशक्तिकरण, पशु कल्याण, स्वच्छता (स्वच्छ भारत) आदि।Ravishankar Good Support
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