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Chhattisgarh News: विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 13 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है.
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नंगे पाँव होने की वजह रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.
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36 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 36 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं.
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  • Chhattisgarh News: विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 13 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है. 
  • 36 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते 
  • एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 36 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. 
  • नंगे पाँव होने की वजह
  • रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.
  • क्या कहते है क्षेत्रवासी
  • जनपद सदस्य चंद्रप्रताप सिंह ने बताया कि रविशंकर तपती धूप में भी नंगे पांव चलकर गरीबों के साथ खड़े रहते है. उनकी मदद करते है. हमने भी उन्हें अपने काम के लिए कई बार कहा. तब वे हमेशा हमारे सुख-दुख में साथ खड़े रहते है. वे लगातार तीन बार जिला पंचायत सदस्य रहे है. और लोगों की भलाई के लिए संघर्षरत हैं. ग्रामीण उमेश केंवट ने बताया कि उन्हें (रविशंकर) को ठंडी, गर्मी, बरसात किसी भी मौसम में बुलाइए वे लोगों की मदद के लिए नंगे पांव आते है. किसी भी प्रकार का काम हो वे आधी रात को भी आते है. और तहसील, जिला से संबंधित हर काम में मदद करते है. हमे ऐसे ही नेता की जरूरत थी. हम ऐसा नेता पाकर खुश हैं.V
  • धर्मार्थ वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए,धार्मिक मंदिर, धर्मशाला, अनाथालय, बाल आश्रम, वृद्धाश्रम, धर्मार्थ अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, मेडिकल और पैरामेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज,और सभी प्रकार की मानव सेवा से संबंधित कार्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य शिविर, गुरुकुल, धार्मिक सेवा और विभिन्न प्रकार के शैक्षिक प्रतिष्ठान और संस्थानों का संचालन, समाज का हर वर्ग धर्म के गरीब लोगों की मदद, मुक्तिधाम सेवा, वाणिज्य के लिए जाता है और उनकी सेवा करता है।
  • कला, विज्ञान, खेल, शिक्षा, अनुसंधान, सामाजिक कल्याण, धर्म, दान, पर्यावरण की रक्षा, महिला सशक्तिकरण, पशु कल्याण, स्वच्छता (स्वच्छ भारत) आदि।

बन जुगनू जगमग कर जाएं, आओ मन का दीप जलाएं

बन जुगनू जगमग कर जाएं, आओ मन का दीप जलाएं
भेद भाव की छोड़ बुराई, भर मन में अपने अच्छाई
दिल में जो अंधकार भरा है, दीपक दिल में बुझा पड़ा है
दिल से नफ़रत द्वेष मिटाएं , आओ मन का दीप जलाएं

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Chhattisgarh News: विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 16 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है. 

40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते 
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 36 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. 

नंगे पाँव होने की वजह
रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.

क्या कहते है क्षेत्रवासी
जनपद सदस्य चंद्रप्रताप सिंह ने बताया कि रविशंकर तपती धूप में भी नंगे पांव चलकर गरीबों के साथ खड़े रहते है. उनकी मदद करते है. हमने भी उन्हें अपने काम के लिए कई बार कहा. तब वे हमेशा हमारे सुख-दुख में साथ खड़े रहते है. वे लगातार तीन बार जिला पंचायत सदस्य रहे है. और लोगों की भलाई के लिए संघर्षरत हैं. ग्रामीण उमेश केंवट ने बताया कि उन्हें (रविशंकर) को ठंडी, गर्मी, बरसात किसी भी मौसम में बुलाइए वे लोगों की मदद के लिए नंगे पांव आते है. किसी भी प्रकार का काम हो वे आधी रात को भी आते है. और तहसील, जिला से संबंधित हर काम में मदद करते है. हमे ऐसे ही नेता की जरूरत थी. हम ऐसा नेता पाकर खुश हैं.

मेरे प्रिय सम्माननीय साथियों भाई एवं बहनों एवं माताओ मै आप मन के बेटा रविशंकर सिंह ( ‌जनसेवक एवं अध्यक्ष, जिला पंचायत मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़) आप मन सभी बड़े बुजुर्गो के चरण ल छूकर आशीर्वाद मांगत हो एवं आप मन सबों ल ये विश्वास दिलाथो की आप मन जो उम्मीद एवं विश्वास से मोला जनसेवक बानाऐ हो ओ विश्वास ल सदैव पूरा करे के पूर्ण प्रयास ल करहू पुनः आप मन ल बहुत बहुत बधाइयां एवं धन्यवाद

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40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते 
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. 

रविशंकर सिंह

40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते 
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. 

रविशंकर सिंह

40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते 
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. 

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40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते 
एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. 

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एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं

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एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं

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विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 16 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है.

रविशंकर

रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.

रविशंकर

एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 40 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. 

रविशंकर

क्या कहते है क्षेत्रवासी
जनपद सदस्य चंद्रप्रताप सिंह ने बताया कि रविशंकर तपती धूप में भी नंगे पांव चलकर गरीबों के साथ खड़े रहते है. उनकी मदद करते है. हमने भी उन्हें अपने काम के लिए कई बार कहा. तब वे हमेशा हमारे सुख-दुख में साथ खड़े रहते है. वे लगातार तीन बार जिला पंचायत सदस्य रहे है. और लोगों की भलाई के लिए संघर्षरत हैं. ग्रामीण उमेश केंवट ने बताया कि उन्हें (रविशंकर) को ठंडी, गर्मी, बरसात किसी भी मौसम में बुलाइए वे लोगों की मदद के लिए नंगे पांव आते है. किसी भी प्रकार का काम हो वे आधी रात को भी आते है. और तहसील, जिला से संबंधित हर काम में मदद करते है. हमे ऐसे ही नेता की जरूरत थी. हम ऐसा नेता पाकर खुश हैं.

जय जय श्री राम

एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 36 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते हैं

Chhattisgarh News: विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 16 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है. 

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नंगे पाँव होने की वजह
रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.

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रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.

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29 Jan
Organized:ravishankarbairagi.com

RAVISHANKAR SINGH

Ravishankar singh
अध्यक्ष जिला पंचायत मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़) खजान्ची कालोनी, जनकपुर (छत्तीसगढ़) ग्राम कन्नौज (भरतपुर) तह, भरतपुर पोस्ट जनकपुर जिला मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़) पिन 497778 मो.नं. 9165439739 +916263101888 Email :- ravishankar02020@gmail.com Website : www.ravishankarbairagi.com
19 Mar
Organized:Hopeandtrust Help For All Foundation

RAVISHANKAR SINGH

यशवंती रविशंकर,अध्यक्ष, जिला पंचायत मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़)
खजान्ची कालोनी, जनकपुर (छत्तीसगढ़) ग्राम कन्नौज (भरतपुर) तह, भरतपुर पोस्ट जनकपुर जिला मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर (छत्तीसगढ़) पिन 497778 मो.नं. 9165439739 +916263101888 Email :- ravishankar02020@gmail.com Website : www.ravishankarbairagi.com

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