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OUR JOURNEY

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रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.

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नंगे पाँव होने की वजह

रविशंकर सिंह ने बताया कि वो 2010 से नंगे पैर हैं. उन्होंने कहा कि एक बार वो अपने क्षेत्र के दौरे पर निकले थे. तो एक व्यक्ति तपती धूप में नंगे पैर थे, उनके पैर में छाले पड़ गए थे. वो इस पेड़ की छांव, उस पेड़ की छांव में दौड़ दौड़कर जा रहा था. तब उन्होंने अपना चप्पल उस व्यक्ति को दे दिया और उस गांव में गए तो वहां की स्थिति बहुत दयनीय थी. अभावकाश जीवन जीने के लिए लोग मजबूर थे. तब उन्होंने वहीं पर अपना चप्पल उतार दिया और संकल्प लिया कि जब तक गांव के लोगों ओए उत्थान, और सशक्त नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि वे नंगे पैर रहकर ये एहसास करते है, कि उनके जैसे सैकड़ों लोग होंगे. जिनके के पैर में छाले पड़ते होंगे, कांटे लगते होंगे. जब तक मेरे क्षेत्र में परिवर्तन नहीं होंगे, लोग आत्मनिर्भर नहीं होंगे. तब तक नंगे पैर रहूंगा.

विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण

विश्वकल्याण या फिर देश कल्याण की बात करके, साधु-महात्माओं के त्याग की कहानी अब पुरानी हो गई है. पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में एक युवा नेता के त्याग की कहानी राजनीतिक गलियारों के लिए एकदम नई है. जिले में एक ऐसा युवा नेता हैं जो ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन के लिए सिस्टम से लड़ रहा है. जिसको लेकर उसने 16 साल पहले ही नंगे पाँव रहने का वचन लिया है. इस नेता के इस त्याग के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है. 

40 वर्षीय रविशंकर सिंह आदिवासी समाज से आते

एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के रहने वाले 40 वर्षीय रविशंकर सिंह (Ravi Shankar Singh) आदिवासी समाज से आते हैं. उनकी लोकप्रियता ऐसी है कि लोग उन्हें अपने अपने क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए बुलाते है. नतीजा ये है कि 36 साल की उम्र में रविशंकर तीन बार जिला पंचायत के सदस्य बन चुके हैं. और खास बात ये है कि लोगों की माँग पर वो तीनों बार अलग-अलग क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं. गौरतलब है कि क्षेत्र में एक मददगार और जमीनी नेता की पहचान बना चुके रविशंकर सिंह अब तक जिन क्षेत्रों से चुनाव लड़े हैं. उन क्षेत्रों में उनके समाज के वोट कम है. लेकिन लोग जातिवाद के ऊपर उठ कर रविशंकर सिंह को अपना चुके है. यही वजह है कि ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए 36 वर्षीय रविशंकर सिंह ने चप्पल जूते त्याग दिए हैं. और यही वजह है कि वो अब नंगे पाँव वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. 

  बन जुगनू जगमग कर जाएं, आओ मन का दीप जलाएं

भेद भाव की छोड़ बुराई, भर मन में अपने अच्छाई
दिल में जो अंधकार भरा है, दीपक दिल में बुझा पड़ा है

दिल से नफ़रत द्वेष मिटाएं , आओ मन का दीप जलाएं 

MANGAL SHANTI

Monthly Mangal Puja and Homa is done to nullify the malefic effects of Mangal and to enhance its positive impacts in an individual’s Natal Chart (Horoscope).

NAVGRAH SHANTI AND NAVGRAH HOMA

The Navgrah Shanti Puja means worshipping all the nine planets. It is an auspicious ritual dating back to the ancient Vedic times. This is a very eminent puja where all the nine planets namely Surya, Chandra, Kuja or Mangal, Budh, Guru, Shukra, Shani, Rahu and Ketu are worshipped collectively.

RIGVEDA-YAJURVEDA-SAMVEDA-ATHARVAVEDA- PATH AND HOMA

Since the Vedas teach these three paths to salvation, they are referred to as trayi. The Rig Veda is identified with the path of knowledge, the yajur Veda.

 

MAHAMRITYUNJAY JAP

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HOMA

A homa is sometimes called a “sacrifice ritual” because the fire destroys the offering, but a homa is more accurately a “votive ritual”. The fire is the agent, and the offerings include those that are material and symbolic such as grains, ghee, milk, incense and seeds.

 

LAGHU MRITYUNJAY JAP

Just as the fruit is liberated from the bondage of the tree, may we also be liberated from death and impermanence.”

SAHASTRCHARNA

Sahastradhara, which literaly means ‘Thousand fold spring’ is a famous tourist spot in Dehradun. At the Baldi river, Sahastradhara is located at 14 km from Dehradun city. Tourist visit Sahastradhara in large numbers to watch beauty of waterfalls and caves.

NAVCHANDI PATH

The Navchandi Paath and Yagna is a very unique sacrificial rite involving powerful Saptashati mantras and involves 9 recitations of Durga Saptshati. Shaligram Shala Puja and Yajna Services book Navchandi Paath and Yajna and perform this ritual as per Vedic based.

SHATCHANDI PATH HOMA , PURAN PATHA BHAGVAT PATHA AND BHAGVAT KATHA , MANGAL DOSH SHANTI ,SHRI SHUKTAM PATH,HOMA. KANAKDHARA PATH, VISHNU SAHASTRANAM PATH, LALITA SAHASTRANAM PATH, BLACK MAGIC REMOVE POOJA , SANTAN PRAPTI POOJA, GRIHPRAVESHA , VASTU SHANTI POOJA , LAKSHMI POOJA, SUDARSHNA HOMA, GANPATI HOMA, VIVAH , VISHNU YAGYA , RUDRA YAGYA, HANUMAT YAGYA, DURGA (CHANDI)YAGYA , MURTI PRAN PRATISHTHA, AND ALL TYPE POOJA